सरकार जिस तरह से जनसंख्या नियंत्रण कानून या अन्य कानून ला रही है ठीक उसी तरह बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने के लिए सरकार को महंगाई नियंत्रण कानून भी लाना चाहिए।
लगभग 1 वर्ष से भी अधिक समय होने को है जबसे कोरोना के कारण व्यवसाय, नौकरी, मार्केट इत्यादि ठप है और बेरोजगारी चरम पर है तो वहीं दूसरी तरफ अब महंगाई ने लोगो का जीना मुश्किल कर दिया है।
कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी का अब असर दूसरे लगभग हर एक बस्तुओं पर भी दिखने लगा है, ट्रांसपोर्टेशन महंगा होने का हवाला देते हुए कंपनियां अपने प्रोडक्ट के दाम बढ़ा रही हैं, खाने के तेल से लेकर चावल, दाल, सब्जियां, गैस सिलेंडर, चाय पत्ती और दूध जैसी बुनियादी चीजों की कीमतें आसमान छू रही हैं और आम जनता महंगाई की मार झेल रही है.
महंगाई पर आने वाले आंकड़े कंज्यूमर प्राइस इनफ्लेशन (CPI) और होलसेल प्राइस इनफ्लेशन (WPI) भी इसकी तस्दीक करते हैं। इन आकड़ो पर नजर डाले तो अप्रैल में रिटेल महंगाई (CPI) 4.23% पर थी जो मई में बढ़कर 6.30% हो गई. ये RBI की महंगाई की चरम सीमा रेखा पार कर चुकी है, बाजार और इकनॉमी के विशेषज्ञों को जो उम्मीद थी रिटेल महंगाई उससे भी ज्यादा तेजी के साथ उछाल मार रही, जून में खाद्य महंगाई 1.96% से उछाल मारकर 5.01% के स्तरों पर पहुंच गई है।
वहीं थोक महंगाई दर जून में बढ़कर रिकॉर्ड उच्च स्तर 14.5 फीसदी पर पहुंच गई।
पिछले कुछ महीनों में देखा गया है कि रिटेल महंगाई के मुकाबले थोक महंगाई ज्यादा तेजी से बढ़ रही है।
सरसों के तेल पर महंगाई की मार
जून 2021 में कीमतें 10 साल के उच्चतम स्तरों पर हैं. 90-100 रुपये प्रति लीटर बिकने वाला तेल एक साल के अंदर-अंदर 150-160 में बिक रहा है. हालांकि अब सरकार कह रही है कि ग्लोबल बाजारों में खाने के तेल में गिरावट के बाद भारत में दाम गिरेंगे. ये कहने के बाद भी महीनों का वक्त बीत गया, तेल में आग जस की तस लगी हुई है.
सरकारी डेटा के ही मुताबिक जून 2020 से जून 2021 के बीच ग्राउंडनट ऑयल की कीमतें करीब 20%, सरसों के तेल की कीमत करीब 50%, वनस्पति तेल की कीमत 45% और सनफ्लावर, पाम तेल की कीमतें करीब 60% बढ़ी हैं.
चावल, दाल और रोटी भी हुई महंगी,
चावल दाल को गरीबों के जीने का आसरा कहा जाता रहा है लेकिन अब दाल पर भी महंगाई का प्रहार हुआ है, दालों के भावों में भी अच्छी खासी बढ़ोतरी दर्ज हुई है. एक साल पहले 90-95 रुपये प्रति किलो के भाव से बिकने वाली अरहर की दाल अब 110-120 रुपये प्रति किलो में मिलने लगी है, इसी तरह उड़द, मूंग, मसूर, चना दाल की भी कीमतें बढ़ी हैं, महंगाई में आग लगाने के लिए अगर सबसे ज्यादा कोई जिम्मेदार है तो है तेल की कीमतें बीते हफ्तों में डीजल और पेट्रोल के बढ़ते दामों ने जमकर हेडलाइन बनाई हाल ये है कि पेट्रोल अब कुछ शहरों में 105-110 रुपये तक भी बिक रहा है.
दरअसल पेट्रोल-डीजल के भाव बढ़ने से ट्रांसपोर्ट महंगा हो जाता है और ट्रांसपोर्ट महंगा होते ही बाकी दूसरी चीजें भी महंगी होने लगती हैं और इकनॉमी पर उसका बहुत बुरा असर होता है. दूसरी तरफ सरकार गैस सिलेंडर के दाम भी बढ़ रहे है, इससे तैयार खाने की कीमतें भी और बढ़ सकती हैं, इसका सीधा असर आम आदमी पर पड़ेगा।

: शाबिर अली

(लेखक युवा नेता हैं)

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