कमला हैरिस
Democratic U.S. presidential candidate Senator Kamala Harris (D-CA) speaks at the North America's Building Trades Unions (NABTU) 2019 legislative conference in Washington, U.S., April 10, 2019. REUTERS/Yuri Gripas

कमला हैरिस (Kamla Harris) को डेमोक्रेटिक पार्टी ने उपराष्ट्रपति(vice-president) पद का उम्मीदवार बनाया है. उनकी मां भारतीय मूल की हैं और पिता जमैका मूल के हैं। तलाक के बाद हैरिस को उनकी हिंदू मां ने अकेले ही पाला था।

 कमला अमेरिका में एक शांत स्वभाव की तेजस्वी नेता मानी जाती हैं और उनका स्पीच भी बहुत अच्छा होता है। उनकी पक्षधरता स्पष्ट है। उनका नाम सामने आने से महिलाओं, युवाओं, अश्वेतों और कैलिफ़ोर्निया में जहां से वह सीनेटर हैं, निश्चित रूप से उनके चुनाव अभियान को एक नई दिशा मिलेगी।

कमला को नॉमिनेट करके डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी चुनाव में बड़ा गेम खेला है।

कमला भारतीय मूल के अमेरिकियों का वोट का शेयर डाइवर्ट कर सफल तो हो ही सकती हैं इसके आलावा अश्वेत अमेरिकन (Black Americans) के रिपब्लिकन पार्टी के वोटों का भी ध्रुवीकरण भी करने में सक्षम हैं। अफ्रीकी मूल के अमरीकियों के करीब 13 फ़ीसदी वोट हैं और कई राज्यों में उनके वोट काफ़ी अहम हैं।

joe biden with kamla devi harris
Joe Biden with Kamla Devi Harris pc-opoyi

जो. बाइडेन (Joe Biden) को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने से पहले रिपब्लिकन पार्टी को ऊपर काफी उम्मीदें थी लेकिन चुनाव प्रचार में जो बाइडेन का कोई ख़ास लहर अभी तक नही बन पाया है। ऐसे में डेमोक्रेटिक पार्टी जो. बाइडेन के प्रभाव को बढ़ाने के लिए कमला हैरिस का नाम सामने लाया है।

अगर जो.बाइडेन राष्ट्रपति बनते हैं तो भारत और अमेरिका के बीच आपसी साझेदारी बढ़ेगी या नहीं?

भारतीय मूल की कमला हैरिस को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाते ही पूरी दुनिया में यह खबर फैल गई, लेकिन इस खबर का भारत में कुछ खास असर दिखा। और लोग सोशल मीडिया पर जश्न मनाने लगे। लेकिन आपको बता दें कि कमला हैरिस स्थानीय भारतीय मूल के नेताओं का भी समर्थन नहीं करती हैं। यहां तक कि कश्मीर के विवाद में उनका रुख कुछ और ही है।

आमतौर पर यह देखने को मिलता है कि जो भारतवंशी अमेरिका में पैदा हुए वहां पले बढ़े और वहां पर अपने सर्विस को ज्वाइन किया। वह भारत के ज्यादा फेवर में नहीं रहते। वह एक सामान्य अमेरिकी नागरिक की तरह ही व्यवहार करते हैं। उदाहरण के तौर पर जब भारत में सुनीता विलियम् के अंतरिक्ष में जाने का और वहां से आने का जश्न मनाया जा रहा था और भारतीय अपने पीठ थपथपा रहे थे। तब सुनीता विलियम का बयान आया था कि वह अमेरिकी नागरिक हैं।

अभी यह एक इतिहास ही रहा है कि अमेरिका भारत का हर कदम पर साथ पहली बार दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी के हर एक कदम का समर्थन कर रहे हैं। चाहे वह चीन की बात हो। या पाकिस्तान के यूनाइटेड नेशन में भारत विरोधी बात पर असमर्थन देना।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि? कमला हैरिस के उपराष्ट्रपति बनने पर भी भारत और अमेरिका के बीच साझेदारी कुछ खास नहीं बढ़ेगी।

कमला हैरिस का कश्मीर मामले में रुख़ क्या है ?

कमला हैरिस ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म करने के बाद वहां के हालात को काबू में करने के लिए पाबंदियां लगाए जाने का विरोध किया था। कमला सीधे तौर पर भारतीय सरकार से कश्मीर में लगाए गए पाबंदियों को हटाने की मांग की थी।

क्या कमला हैरिस भविष्य में अमेरिका की राष्ट्रपति हो सकती हैं?

kamla harish

अगर जो बाइडेन यह चुनाव जीत जाते हैं तो अगले चुनाव तक वह 81 साल के हो जाएंगे ऐसे में 59 साल की कमला अगर अपने उपराष्ट्रपति पद को अच्छे उम्मीदवार के रूप में प्रोजेक्ट कर पाती हैं तब राष्ट्रपति के तौर पर 2024 में कमला हैरिस का नाम पक्का हो सकता है।

इस वर्ष के चुनाव में किसका पलड़ा है भारी

मनमाउथ यूनिवर्सिटी ने अभी जल्दी ही एक पोल कराया था। उस पोल के मुताबिक मौजूदा समय में बाइडेन 51% वोटर्स का पक्ष जीतने में सफल रहे हैं पर ट्रम्प पर 41 प्रतिशत लोग हैं विश्वास जता पाए। एक और टीवी चैनल सीबीएस न्यूज़ ने रविवार को एक सर्वे कराया था जिसमें ट्रंप के खिलाफ बाइडेन की बढ़त मात्र 6% की रही यानी कि ट्रम्प को 42% लोगों का समर्थन है और बाइडेन को 48% लोगों का समर्थन है।

यह बढ़त आने वाले दिनों में घट भी सकता है इन दोनों सर्वेक्षणों को देखकर यह कहना गलत होगा की बाइडेन की जीत आसानी से हो जाएगी क्योंकि पिछले राष्ट्रपति चुनाव में अगस्त के महीने में चुनाव सर्वेक्षणों में हेलरी क्विंटल, डोनाल्ड ट्रंप के मुकाबले ज्यादा बढ़त बनाई हुई थी। लेकिन जब अमेरिकी चुनाव हुआ तब ट्रंप ने बाजी मार ली।

अमेरिका में राष्ट्रपति पद के चुनाव जीतने के लिए 270 सीटों की जरूरत होती है और अगस्त में जो सर्वे हुआ था उसमें हेलरी को 273 सीटे मिली थी जबकि ट्रम्प को 174 सीटें मिली थी लेकिन उसके बाद अगले सिर्फ 2 महीने में ही ट्रम्प के समर्थन में काफी ज्यादा लोग आ गए और ट्रंप जीत गए। और कहीं ना कहीं एक प्रमुख कारण है कि लोग अभी भी बाइडेन से ज्यादा ट्रंप पर की जीत पर भरोसा कर रहे हैं।

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